Tuesday, April 13, 2021

ग़ज़ल - कमाने वालों की यारों कमाई छूट जाती है

 

1222 - 1222 - 1222 - 1222

कमाने वालों की यारों कमाई छूट जाती है

मुहब्बत सिर चढ़े तो फिर पढ़ाई छूट जाती है


बड़े रिश्ते, मुहब्बत, दोस्ती देखी ज़माने में

ज़रा सी बात पर अब तो कलाई छूट जाती है


इकाई की जगह तुम हो दहाई की जगह दुनिया

इकाई याद रहती है दहाई छूट जाती है


भले ही डीजिटल हम हों गए हों पर गरीबी है

अभी पैसे की किल्लत से दवाई छूट जाती है


मुसलसल काम ही है फार्मूला कामयाबी का

मुसलसल दूध मथने पर मलाई छूट जाती है


– अतुल मौर्य

तारीख: 11 /04/2021

ग़ज़ल

ग़ज़ल-6 भरो हुंकार ऐसी

 1222-1222-1222-1222 भरो हुंकार ऐसी, दिल्ली का दरबार हिल जाए युवाओं कर दो कुछ ऐसा  कि ये सरकार हिल जाए /१/ यहाँ जो बाँटते हैं मजहबों के नाम ...