अधूरा गीत-1
फिर से मिलने लगा हूं किसी से बहुत
फिर से दिल ये धड़कने की कोशिश में है
फिर से चेहरा कोई चांद बनने लगा
फिर कली कोई खिलने की कोशिश में है
ये सभी कोशिशें हैं तो प्यारी बहुत, धारदारी बहुत
फिर से इन धारियों पे ही चलने लगा हूं
दिल मचलने लगा है मैं डरने लगा हूं
मैं डरने लगा हूं
आगमन फिर से श्रृंगार का है हुआ
आचमन मन के हर द्वार का है हुआ
छिन गया जो भी भाया है मन को मेरे
दे गया अश्रु सागर नयन को मेरे
तुम भी भाने लगे हो यही सोचकर
दिल बिखरने लगा मैं सिहरने लगा हूं
मैं डरने लगा हूं
- अतुल मौर्य