गज़ल-
1222/ 1222/ 1222/ 1222
मेरा
मजबूर हो जाना तुम्हारा दूर हो जाना
हमारे
आईना-ए-दिल का चकनाचूर हो जाना
इधर
इक तीर का सीने को खूँ से तर-ब-तर करना
निशाने
पर खुदी के उनका और मगरूर हो जाना
मिरा
कहना हलो जी कौन फिर उस फोन के पीछे
हसीं
इक चाँद से मुखड़े का वो बे-नूर हो जाना
अना को छोड़ कर रिश्ता बचाने जब वो आ जाए
अतुल
घुटने पे आ के तुम उसे मंजूर हो जाना
- अतुल मौर्य
غزل
بحر: 1222/ 1222/ 1222/ 1222
میرا مجبور ہو جانا تمہارا دور ہو جانا
ہمارے آئینۂ دل کا چکناچور ہو جانا
ادھر اک تیر کا سینے کو خوں سے تر بہ تر کرنا
نشانے پر خودی کے ان کا اور مغرور ہو جانا
میرا کہنا ہیلو جی کون پھر اس فون کے پیچھے
حسیں اک چاند سے مکھڑے کا وہ بے نور ہو جانا
انا کو چھوڑ کر رشتہ بچانے جب وہ آ جائے
اتل گھٹنے پہ آ کے تم اسے منظور ہو جانا
— اتل موریہ
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