Thursday, October 22, 2026

मेरे नाम का पहला अक्षर

 ​मैं अक्सर सोचता हूँ

जब वो बस या रेल की खिड़की से

लहकते धान के खेतों को देखती होगी,

तो उसे कौन याद आता होगा?

​

जब हवा उसके चेहरे को छूकर

ज़ुल्फ़ों से उलझती होगी,

तो उसे कौन याद आता होगा?

​

किसी फ़िल्म या प्रेम-उपन्यास के

उस नाज़ुक से मोड़ पर,

जहाँ पर दिल पिघलता है, आँखें भर आती हैं,

वो उस दृश्य में किसको देखती होगी?

​

जब सर्दियाँ उतरती हैं, दिसंबर पास आता है,

या सावन की पहली बारिश गिरती है,

तो क्या किसी का ख़याल उसे छूता भी है?

​

वो जब कैनवस पर रंग बिखेरती होगी,

या किसी ख़ास मौक़े पर मेहंदी रचाती होगी,

तो क्या कभी अनजाने में भी लिख देती होगी—

मेरे नाम का पहला अक्षर?

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